खुद की कीमत मोटिवेशनल कहानी हिंदी में

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हर इंसान के जीवन में ऐसा वक्त आता है, जिसमे वह निराश हो जाता है। किसी कार्य में सफलता नहीं मिलने से निराश और हताश महसुस होना स्वाभाविक है। ऐसे नाजुक वक्त में खुद पर भरोसा और संयम रखना चाहिए। जिंदगी में ऐसे लोग भी मिलेंगे जो आपको आगे बढ़ने नहीं देंगे। आपके हौसलों को कमजोर करने के लिए तरह-तरह की कोशिशें करेंगे। लेकिन इंसान को खुद की कीमत पहचानना आना बहुत जरुरी है। कि ऐसा कोई कार्य नहीं है जो दूसरे कर सकता है और वो नहीं। इसी से सम्बंधित एक मोटिवेशनल कहानी इस पोस्ट में बताने जा रहे है। हमें उम्मीद है कि ये hindi motivational story आपको जरूर पसंद आएगा।

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” खुद की कीमत ” हिंदी मोटिवेशन कहानी “

हर किसी के जीवन में एक शिक्षक की अहम् भूमिका होती है। जीवन में जिस भी मुकाम पर हो उसमे हमारे शिक्षक का बड़ा योगदान होता है। इसी लिए कहा भी गया है –

गुरु गोविन्द दोउ खड़े, काके लागु पाय।

बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय।

ये कहानी भी गुरु और शिष्य की है। एक बार की बात है, एक शिक्षक अपने  कक्षा में पढ़ा रहे थे। तभी उनके मन में आया कि आज अपने शिष्यों को जीवन उपयोगी शिक्षा दिया जाय।

उन्होंने 500 रूपये का नोट सभी बच्चों को दिखाते हुए बोले कि अच्छा बच्चों आज हम कुछ नया सीखेंगे। ये बताओं किसको-किसको मालुम है कि ये कितने रूपये का नोट है ?

» बच्चों ने कहा – 500 रूपये का।

तब शिक्षक ने मुस्कुराते हुए फिर से सवाल किये। अच्छा बताओ कि इसे आप में से कौन – कौन लेना चाहता है ?

» उत्तर में कक्षा के सभी ने हाथ ऊपर कर दिए।

शिक्षक ने कहा थोड़ी देर रुको और उसने 500 रूपये के नोट को दोनों हाथों से कुचल सा दिया। जिससे नोट पर सिलवटें आ गई। इसके बाद शिक्षक ने बच्चो से पूछा कि इस नोट को अच्छे से देखों और बताओं कि अब इस नोट को कौन लेना चाहेगा ?

» उत्तर में फिर से सभी ने हाथ ऊपर कर दिए।

शिक्षक ने कहा अच्छा ठीक है। थोड़ी देर और रुको। अब 500 रूपये के नोट को उसने ज़मीन पर रखकर अपने पैरो से खूब कुचला। इससे नोट पर और ज्यादा सिकुड़न आ गया।

इसके बाद शिक्षक ने नोट को उठाया और सभी बच्चों से एक बार फिर पूछा कि – अब इसे ध्यान से देखो और बताओं कि इसे कौन लेना चाहेगा।

» उत्तर में एक बार फिर सभी बच्चों ने हाथ ऊपर कर दिए।

शिक्षक ने मुस्कुराते हुए बोला कि आज आपको मैंने जीवन में हमेशा काम आने वाला सीख दिया है। इस 500 रूपये के नोट को मैंने हाथ से कुचला लेकिन इसकी कीमत ख़त्म नहीं हुई। ये 500 ही रहा। फिर मैंने अपने पैरों से बुरी तरह रौंदा फिर भी इसकी कीमत नहीं घटी।

ठीक इसी तरह बच्चों, आप सभी हमेशा ये बात ध्यान में रखना कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आ जाये, कितनी भी असफलता और निराशा हाथ लगे आपको “खुद की कीमत” कभी नहीं भूलना है। आप हमेशा से बेहतर थे बेहतर है और बेहतर रहेंगे। असफलता आपकी काबिलियत कम नहीं करता। इसलिए कभी निराश ना हो और हमेशा खुद की कीमत को पहचानकर आगे बढ़ना है।

इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि जिस तरह 500 रूपये के नोट को हाथ या पैर से कुचलने पर उसकी कीमत कम नहीं हुआ ठीक उसी तरह असफलता हमारी कीमत कम या ख़त्म नहीं कर सकता। बस जरुरत है हमें अपने आपको पहचानने की। खुद की कीमत समझने की।

हमें उम्मीद है कि ये छोटी सी मोटिवेशनल कहानी आपको पसंद आया होगा। आपके पास भी कोई motivational  story या quotes होंगे तो उसे नीचे कमेंट बॉक्स में शेयर करके हमारे रीडर्स को मोटीवेट कर सकते है।

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